वैश्वीकरण : नारी
क्या खोया? क्या पाया?
वैश्वीकरण और नारी शोषण
वैश्वीकरण के जरिये जो शोषण चलता है, उसका सबसे अधिक घातक असर तीसरी दुनिया की नारियों पर हुआ है | औरत के सौंदर्य को उपभोक्ता क्रांति का केंद्र बनाया गया | वैश्वीकरण ने औरत को लक्ष्य करते समय नारी की वैयक्तिक विषमताओं पर या गौरव पर ध्यान नहीं दिया |
नारी शोषण का अमानवीय पक्ष
वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था मूलतः साम्राज्यवादी देशो के हितों को साधती है | पूंजीवादी देश अविकसित देशों को अपना आर्थिक उपनिवेश बनाते हैं | वहाँ की महिलाओं को नारकीय जीवन बिताने के लिए बाध्य करता है |
पपुरुष वर्चस्ववादी समाज में वह अपने अधिकार और अस्मिता को बनाये रखने में संघर्षरत है | वह रूढ़िगत व्यवस्था से मुक्त होना चाहती है और साथ ही पुरुष सत्ता को चुनौती देती है |
श्रम : शोषण के अमानवीय तरीके
कृषि- प्रधान देशों के कृषि - श्रमिकों में महिलाओं की संख्या अधिक है | कृषिगत एवं गैर - कृषिगत , दोनों ही क्षेत्रों में दी जाने वाली मजदूरी में भी असमानताएं मौजूद हैं |
ठेके पर कर्मचारी
देश के बड़े कारखानों तथा विदेशी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं की कहानी दर्द भरी है |
कर्मचारियों के लिए आने का समय निश्चित करते हैं पर जाने का कोई समय नहीं है | आधी रात तक काम करना पड़ता है | इसके विरूद्ध आवाज़ उठाये तो कहेंगे कि यह बेरोज़गारी को न्योता देना है |
वैश्वीकरण के कारण औरतों की स्थिति में कुछ परिवर्तन तो अवश्य हुए हैं | भारत में मध्य वर्ग की लड़कियों की शिक्षा में पहले की अपेक्षा वृद्धि हुई है | अब मध्य वर्ग के परिवार भी अपनी औरतों को बाहर भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं | पहले केवल उच्च वर्गीय शिक्षित महिलाएं ही ऐसा कर पाती थी |
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